वसंत ऋतु की महिमा के विषय में कवियों ने खूब लिखा है
गुजराती कवि दलपतराम ने कहा हैः
रूडो जुओ आ ऋतुराज आव्यो। मुकाम तेणे वनमां जमाव्यो।।
अर्थात्
देखो, सुंदर यह ऋतुराज आया। आवास उसने वन को बनाया।।
वसंत का असली आनंद जब वन में से गुजरते हैं तब उठाया जा सकता है। रंग-बिरंगे पुष्पों से आच्छादित वृक्ष..... शीतल एवं मंद-मंद बहती वायु..... प्रकृति मानों, पूरी बहार में होती है। ऐसे में सहज ही प्रभु का स्मरण हो आता है, सहज ही में वसंत ऋतुचर्या के बारे और जानने के लिए यहाँ क्लिक करे

No comments:
Post a Comment